Medieval Era
मध्यकालीन युग
भारत में मध्यकालीन युग राजपूतों के विकास के साथ शुरू होता है। राजपूत सामंतवाद और शौर्य की एक छवि थे। वे समर्पित योद्धा थे, परन्तु राजपूतों के आपस में लड़ने के कारण उनके साम्राज्य कमजोर होते गए। भारत का मध्यकालीन इतिहास काफी हद तक भारतीय शासकों में स्थिरता की कमी की वजह से विदेशी शासन और आक्रमण की घटनाओं से संकुल है। स्थिरता की कमी के कारण, भारत के बाहर से आक्रमणकारी यहाँ आते रहे और अपने राज्यों की स्थापना करते रहे।
राजपूतों के कमजोर होने के कारण तुर्क हर अवसर पर भारत पर आक्रमण किये। तुर्कों को सिर्फ भारत की सम्पन्नता में रुचि नहीं था, बल्कि वे अपने साम्राज्य की स्थापना करना चाहते थे और अन्य राज्यों पर राज्य भी करना चाहते थे। दिल्ली के शासक और एक निडर राजपूत सैनिक पृथ्वीराज चौहान को तुर्की आक्रमणकारी मोहम्मद गोरी ने हराया। उसने दिल्ली पर कब्जा कर लिया और प्रभारी के रूप में सैन्य कुतुब-उद-दीन ऐबक (दास) की नियुक्ति की। कुतुब-उद-दीन ऐबक ने नए शासकों की एक श्रृंखला शुरू की जिसकी पहचान दास वंश के रूप में हुई। यह दिल्ली सल्तनत पर विदेशी राज्य की शुरुआत को चिंन्हित करता है।
गुलाम वंश के बाद खिलजी राजवंश आया था। खिलजी वंश भीषण लड़ाई और शासन पर कब्ज़े के लिए आपसी कलह के लिए प्रसिद्ध है। खिलजी वंश का अंतिम सम्राट एक सक्षम शासक नहीं था और उसकी हत्या कर दी गई जिससे खिलजी राजवंश का पतन हुआ। फिर तुग़लक, सय्यिद, और लोधी आये जिन्होंने एक के बाद एक दिल्ली पर शासन किया। इसके बाद, पानीपत की पहली लड़ाई हुई जिससे लोधी साम्राज्य का अंत और भारत में मुगल शासन की शुरुआत हुई। मध्यकालीन भारत में सिख धर्म का उदय हुआ और यह काल सूफीवाद से प्रभावित रहा। मध्यकालीन काल हिंदू वास्तुकला और इस्लामी शैलियों का एक प्रसिद्ध मिश्रण है। इसी काल में शाह जहाँ ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में ताज महल बनवाया था।