Navigation Bar


पंचवटी

चारु चंद्र की चंचल किरणें,
खेल रहीं थीं जल थल में।
स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई थी,
अवनि और अम्बर तल में।
पुलक प्रकट करती थी धरती,
हरित तृणों की नोकों से।
मानो झूम रहे हों तरु भी,
मन्द पवन के झोंकों से।

 

पंचवटी की छाया में है,
सुन्दर पर्ण कुटीर बना।
जिसके बाहर स्वच्छ शिला पर,
धीर वीर निर्भीक मना।
जाग रहा है कौन धनुर्धर,
जब कि भुवन भर सोता है।
भोगी अनुगामी योगी सा,
बना दृष्टिगत होता है।

 

बना हुआ है प्रहरी जिसका,
उस कुटिया में क्या धन है।
जिसकी सेवा में रत इसका,
तन है, मन है, जीवन है।
 


Nine Unknown Men

Nine Unknown Men are a two millennia-old secret society founded by the Indian Emperor Asoka.