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वसन्त आया

सखि, वसन्त आया
भरा हर्ष वन के मन,
नवोत्कर्ष छाया।

 

किसलय-वसना नव-वय-लतिका
मिली मधुर प्रिय उर-तरु-पतिका
मधुप-वृन्द बन्दी-
पिक-स्वर नभ सरसाया।

 

लता-मुकुल हार गन्ध-भार भर
बही पवन बन्द मन्द मन्दतर,
जागी नयनों में वन-
यौवन की माया।

 

अवृत सरसी-उर-सरसिज उठे;
केशर के केश कली के छुटे,

 

स्वर्ण-शस्य-अंचल
पृथ्वी का लहराया।


Nine Unknown Men

Nine Unknown Men are a two millennia-old secret society founded by the Indian Emperor Asoka.